अक्षरधाम मंदिर के बारे में 10 आश्चर्यजनक तथ्य

अक्षरधाम मंदिर में भारत के ऋषियों, साधु, आचार्य और दिव्य अवतारों के 200 पत्थर की मूर्तियां शामिल हैं. इस मंदिर में 234 नक्काशीदार स्तंभ, 9 अलंकृत गुंबद, गजेन्द्र पीठ और भारत के दिव्य महापुरूषों की 20,000 मूर्तियां शामिल हैं.

अक्षरधाम मंदिर नारायण सरोवर से घिरा हुआ है, जो कि एक झील है और भारत में 151 झीलों से पानी लेती है. झील के पास 108 चेहरे गाय (गोमुख) के हैं, जो 108 हिन्दू देवताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं और यहाँ राजस्थान से लाए हुए लाल पत्थरों से बनी 3000 फीट लम्बी परिक्रमा है, जिसकी संरचना दो मंजिला जितनी है, इसमें 1,152 खंभे और 145 खिड़कियां हैं. यह परिक्रमा मंदिर के चारों तरफ एक सुंदर माला की तरह फैली हुई है. परिक्रमा में चलते समय इन 108 गौमुख से पानी की सुखदायक आवाज भी सुनाई पड़ती हैं.

अक्षरधाम मंदिर में एक अति सुंदर उद्यान भी है, जिसे लोटस गार्डन कहाँ जाता है, जिसका नाम इसके आकार के कारण पड़ा है. ऊपर से जब इसे देखा जाता है, तो यह एक जलमग्न उद्यान में बड़े पत्थरों पर उत्कीर्ण शेक्सपियर, मार्टिन लूथर, स्वामी विवेकानंद और स्वामीनारायण जैसे महान दिग्गजों के उद्धरणों से निर्मित कमल के सामान दिखाई देता है.

एक और दिलचस्प तथ्य अक्षरधाम मंदिर के बारे में यह है कि मंदिर में 10 गेट हैं, जो वैदिक साहित्य के अनुसार 10 प्रमुख दिशाओं का प्रतिक हैं. ये द्वार दर्शाते हैं कि सभी दिशाओं से अच्छाई आती रहेगी.

अक्षरधाम मंदिर में यज्ञपुरुष कुंड है जो दुनिया में सबसे बड़ा यज्ञ कुंड है. इसमें 108 छोटे तीर्थ हैं और कुंड की ओर जाने वाले 2870 कदम हैं. यह शानदार और भव्य मंदिर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में जगह हासिल कर चुका है. 17 दिसंबर 2007 के दिन, अंतर्राष्ट्रीय संगठन द्वारा अक्षरधाम मंदिर को विश्व में सबसे बड़ा व्यापक हिंदू मंदिर घोषित किया गया था

स्मारक के अंदर हिंदू तपस्वीयों, साधुओं और आचार्यों की 20 हजार प्रतिमाएं स्थित हैं. इसके आधार पर गजेंद्र पीठ स्थित है, जिसका निर्माण हिन्दू संस्कृति और भारत के इतिहास में इसके महत्व को सम्मान देने के लिए किया गया है. इसके केंद्रीय गुंबद के नीचे 11 फुट ऊंची स्वामी नारायण की प्रतिमा है, जिसके चारों ओर इस संप्रदाय के अन्य गुरूओं की प्रतिमाएं स्थित हैं. प्रत्येक मूर्ति हिन्दू परंपरा के अनुसार "पांच धातुओं" से बनाई गई है.

स्मारक के भीतर लक्ष्मी नारायण, शिव पार्वती, राधा कृष्ण और सीता राम सहित अन्य हिंदू देवताओं की मूर्तियां भी हैं. परिसर के भीतर एक थियेटर है, जिसे नीलकंठ के रूप में जाना जाता है, जो स्वामीनारायण के जीवन से होने वाली घटनाओं को दर्शाता हैं

इस सुंदर मंदिर का शानदार संगीतमय फव्वारा शो दर्शकों के लिए एक बड़ा आकर्षण का केंद्र है, जिसे सर्किल ऑफ़ लाइफ़ कहा जाता है, प्रत्येक शाम यहा 15 मिनट का एक शानदार प्रदर्शन होता हैं. यह शो जीवन के चक्र को दर्शाता है, जन्म से लेकर मृत्यु तक, सुंदर रंगीन फव्वारे के साथ सभी घटनाओं को चित्रित करता है.

"सांस्कृतिक विहार" एक नाव की सवारी है जो दर्शनार्थीयों को प्राचीन इतिहास के मॉडल देखने के लिए कराई जाती है. मॉडल प्राचीन भारत के विश्वविद्यालयों, बाजारों और सभ्यता को प्रदर्शित करते हैं. बोट की सवारी, भारतीय संस्कृति और सभ्यता के महत्व को दर्शकों को दर्शाने के लिए एक उत्कृष्ट प्रयास है.

अक्षरधाम मंदिर रात में काफी सुंदर लगता हैं, इसकी सजावट ही इतनी मनमोहक तरीकों से की गई हैं कि यह एक अकाल्पनिक दृश्य के समान है. यह यमुना के तट पर रोशनी और सजावट में प्रकाशित होता है.