कोणार्क सूर्य मंदिर के बारे में रोचक तथ्य

कई आक्रमणों और प्राकृतिक आपदाओं के कारण जब मंदिर जर्जर होने लगा तो सन् 1901 में उस समय के गवर्नर जॉन वुडबर्न ने जगमोहन मंडप के चारों दरवाजों पर दीवारें उठवा दीं और इसे पूरी तरह रेत से भर दिया। ताकि ये सलामत रहे और इस पर किसी प्राकृतिक या मानवीय आपदा का प्रभाव ना पड़े।

यह काम 1903 में जाकर संपन्न हो सका। वहां जाने वालों को कई बार यह पता नहीं होता था कि मंदिर का अहम हिस्सा जगमोहन मंडप बंद करवा दिया गया है। बाद में आर्कियोलॉजिक के कई खोजकारों ने कई मौकों पर मंदिर के अंदर के हिस्से को देखने की जरूरत बताई और रेत बाहर निकालने का सुझाव दिया।

यह मंदिर दो हिस्सों में बना हुआ है जिसमे प्रथम भाग में भगवान सूर्यनारायण की किरने मंदिर तक पहुँचती है और मंदिर के अन्दर स्थित मूर्ति पर पड़ती है जिससे बनने वाला नजारा अत्यंत ही मनोहारी होता है। उसी ओर मंदिर में एक कलाकृति में एक इंसान, हाथी और शेर से दबा है जो की पैसे और घमंड व अंहकार का घोतक है और ज्ञान बढाने वाला भी है।

कोणार्क के बारे में एक बात यह भी कही जाती है कि यहां आज भी नर्तकियों की प्रेत आत्माए आती हैं और नृत्य करती है। अगर कोणार्क में रहने वाले पुराने लोगों की मानें तो आज भी यहां आपको शाम में उन नर्तकियों के पाजेबों की आवाज सुनाई देगी जो कभी यहां राजा के दरबार में नृत्य करती थीं।