भारत के राष्ट्रीय ध्वज में प्रस्तुत अशोक चक्र से जुड़े रोचक तथ्य

अशोक चक्र का अविष्कार महामानव गौतम बुद्ध ने किया था। जब उन्होंने बनारस के पास सारनाथ में अपने से पहले के 27 बुद्धों के बनाए धर्म में आवश्यक सुधार करके उसमें परिवर्तन किया तो उन्होंने उसका नाम ‘धम्म चक्र परिवर्तन’ रखा।

भारत का प्रतीक चिन्ह ‘अशोक चक्र’ जिसे कर्तव्य का पहिया भी कहा जाता है। इसमें 24 तीलियाँ होती हैं जिनमे हर एक तीली का एक विशेष मतलब होता है। जिसके बारे में हम आगे आपको बताएंगे।

अशोक चक्र को मानव ह्रदय बताया गया। मानव के शरीर में 24 पसलियां होती हैं। इसलिए चक्र में भी 24 तीलियाँ रखी गईं और इसे ही सम्राट अशोक महान ने भी अपने जीवन आदर्श के रूप में अपनाया।

भारत के राष्ट्रीय ध्वज में अशोक चक्र को स्थान दिया गया है। इसके आलावा सम्राट अशोक के बहुत से शिलालेखों पर प्रायः एक चक्र बना हुआ है। इसे अशोक चक्र कहते हैं। यह चक्र धर्मचक्र का प्रतीक है। उदाहरण के लिए सारनाथ स्थित सिंह-चतुर्मुख एवं अशोक स्तम्भ पर अशोक चक्र विद्यमान है।

यंग इंडिया नामक अपनी पत्रिका में लिखते हुए, महात्मा गांधी ने पहली बार 1921 में भारतीय ध्वज की आवश्यकता के बारे में बात की थी। उन्होंने केंद्र में चरखा के साथ एक ध्वज का प्रस्ताव रखा था।

कांग्रेस के सत्र बेजवाड़ा (वर्तमान विजयवाड़ा) में किया गया यहाँ आंध्र प्रदेश के एक युवक पिंगली वैंकैया ने एक झंडा बनाया और गांधी जी को दिया। यह दो रंगों का बना था। लाल और हरा रंग जो दो प्रमुख समुदायों अर्थात हिन्दू और मुस्लिम का प्रतिनिधित्वं करता है।

गांधी जी ने सुझाव दिया कि भारत के शेष समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए इसमें एक सफेद पट्टी और राष्ट्र की प्रगति का संकेत देने के लिए एक चलता हुआ चरखा होना चाहिए।

1931 की बैठक में ध्वज कुछ परिवर्तनों से गुजरा और यह कांग्रेस का आधिकारिक झंडा बन गया।

आजादी से एक महीने पहले, स्वतंत्र भारत के लिए एक ध्वज का चयन करने के लिए बनाई गई समिति ने सिफारिश की थी कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के ध्वज को उपयुक्त संशोधनों के साथ भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया जाए। और इसलिए, कांग्रेस के झंडे के चरखे को चक्र से बदल दिया गया।

22 जुलाई 1947 के दिन संविधान सभा ने तिरंगे को, देश के झंडे के रूप में स्वीकार किया था और हमारे राष्ट्र ध्वज के निर्माताओं ने जब इसका अंतिम रूप फाइनल किया तो झंडे के बीच में चरखे को हटाकर इस अशोक चक्र को स्थापित किया गया जो कि भारत के संविधान निरमाता डॉ. बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर ने लगवाया।

अशोक चक्र में चौबीस तीलियां हैं वे मनुष्य के अविद्या से दुरूख बारह तीलियां और दुरूख से निर्वाण बारह तीलियां की अवस्थाओं का प्रतिक है।

अशोक चक्र, सम्राट अशोक के समय से शिल्प कलाओं के माध्यम से अंकित किया गया था।

अशोक चक्र को धर्म चक्र भी कहा जाता है धर्म-चक्र का अर्थ भगवन बुद्ध ने अपने अनेक प्रवचनों में अविद्या से दूरूख तक बारह अवस्थाये और दूरूख से निर्वाण की बारह अवस्थाएं बताई है।

चक्र पर 24 तीली जीवन के एक सिद्धांत और दिन में चौबीस घंटे का प्रतीक है, इसीलिए इसे ‘समय का पहिया’ भी कहा जाता है। हर एक तीली का एक विशेष मतलब होता है