यूनिस न्यूटन फोट पहली महिला वैज्ञानिक थी जिन्होंने ग्लोबल वार्मिंग के बारे में अद्वितीय योगदान दिया।

1856 में हुए एक वैज्ञानिक सम्मेलन में यूनिस ने अपनी ग्लोबल वार्मिंग के अध्ययन को प्रस्तुत किया था।

यूनिस ने अपने अध्ययन में बताया कि विभिन्न गैसों के तापमान परिवर्तन से पृथ्वी के मौसम में परिवर्तन होता है।

उन्होंने विद्युतीय आदर्शों के आधार पर ग्लोबल वार्मिंग के असर को प्रकट किया।

यूनिस ने पाया कि विभिन्न गैसों की मिश्रण और प्रतिशत में बदलाव ग्लोबल वार्मिंग को प्रभावित कर सकते हैं।

उन्होंने अपने अध्ययन में सूर्यमंडल के वायुमंडलीय गैसों के प्रभाव की भी बात की।

यूनिस ने पहली बार इस बात की जांच की कि जीवों के श्वसन द्वारा वायुमंडल में बदलाव आता है।

उन्होंने बताया कि कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य ग्लोबल वार्मिंग प्रभावी गैसों के प्रतिशत में वृद्धि होने के कारण जीवों को ज्यादा संघर्ष करना पड़ता है।

उन्होंने बताया कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण हिमनदीय वनों का पिघलना हो सकता है और जीवों के लिए खतरा पैदा हो सकता है।

उन्होंने पाया कि जल स्तर की बढ़ोतरी ग्लोबल वार्मिंग के एक प्रमुख परिणाम हो सकती है।

उन्होंने बताया कि पृथ्वी के तापमान में वृद्धि ग्लोबल वार्मिंग का मुख्य कारण है।

यूनिस ने पहली बार इस बात की पहचान की कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण बर्फीले क्षेत्रों में घाटी के रूप में एक परिवर्तन हो सकता है।

उन्होंने इस बात की भी जांच की कि जीवों की जीवन पद्धति ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव से प्रभावित होती है।

यूनिस ने अपने अध्ययन में बताया कि वृक्षों के जीवन चक्र में ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव से परिवर्तन हो सकता है।

उन्होंने साबित किया कि ग्लोबल वार्मिंग से प्रभावित पर्यावरण में बदलाव होता है और हमें इस पर ध्यान देना चाहिए।